नज़रिया
हर घटना को देखने और महसूस करने का अपना अपना नज़रिया होता है. इसी भाव को कविता के रूप में दिखाया गया है. एक संदेशात्मक लघु कविता.
इन अक्षरों में तेरा
अक्स नज़र आता है,
दूर ही सही हर लम्हा
मेरे करीब नज़र आता है.
(कुछ मित्र ऐसे होते है जो दूर रहकर भी मित्रता की परिभाषा को साबित कर देते है )
तेरा अक्स नजर आता है Read More »
Poetryव्यक्ति के भविष्य का बदलाव उसके वर्तमान दिन के बदलाव पर निर्भर करता है. यह जानते हुए भी हम अपनी वर्तमान को बदल नहीं पाते है. इसका वजह क्या है ?
बंद आँखों और बेतरतीब बदन देखकर,
वह समझता है
मैं सो रही हूँ.
वह समझता है, मैं सो रही हूँ … Read More »
Poetryरविवार आने की उत्सुकता सबको रहती है. इस दिन समान्यतः मौज मस्ती और किसी से मिलने का वादा होता है. लेकिन रुकिए. आज शनिवार है एक दिन और इंतज़ार कीजिये.
आँखें खुली होतीं है तो सामने होते हो, जब बंद होती हैं तो पलकों के अन्दर होते हो, जब अकेली होती हूँ तो शरारत करते हो. तुम चोर हो, चोरी करते हो.
तुम चोर हो, चोरी करते हो Read More »
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