चलो, कहीं और चलते हैं …
क्या हमने अपनी ज़िंदगी अपनी पसंद से जी है ? “चलो, कहीं और चलते हैं” एक ऐसे मन की आवाज़ है, जो वर्षों की जिम्मेदारियों और भाग-दौड़ के बाद अब थोड़ा अपने लिए जीना चाहता है.
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Poetryक्या हमने अपनी ज़िंदगी अपनी पसंद से जी है ? “चलो, कहीं और चलते हैं” एक ऐसे मन की आवाज़ है, जो वर्षों की जिम्मेदारियों और भाग-दौड़ के बाद अब थोड़ा अपने लिए जीना चाहता है.
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Poetryहम दोनों में एक फर्क है,
मैं जीवन हूँ प्रतिदिन का,
तुम वक़्त हो एक दिन का …
( एक दिन के महत्त्व को परिभाषित करती एक भावपूर्ण रचना )
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Poetryहम कविता चुराते है,
गिरती हुई पलकों से,
जुबा की खामोशी और
आँखों की बोली से…
( चेहरे की भाषा से बनती एक खुबसूरत कविता )
हम कविता चुराते है. Read More »
Poetryकभी कभी,
बेवज़ह बातें हो जाती हैं,
जब दिल करता है जुड़ने का,
एक जरूरत निकल आती है…
( बेवजह बातों का भी कुछ वजह होता है. )
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Poetry