तराजू
कुछ लोग ज़िंदगी को तराजू की तरह जीते हैं—जहाँ हर रिश्ता, हर भावना तौली जाती है. यह कविता जीवन के संतुलन और इंसानी सोच की सच्चाई को गहराई से दर्शाती है. कविता पढ़ें और खुद महसूस करें…
हम दोनों में एक फर्क है,
मैं जीवन हूँ प्रतिदिन का,
तुम वक़्त हो एक दिन का …
( एक दिन के महत्त्व को परिभाषित करती एक भावपूर्ण रचना )
तुम वक़्त हो एक दिन का Read More »
Poetryहम कविता चुराते है,
गिरती हुई पलकों से,
जुबा की खामोशी और
आँखों की बोली से…
( चेहरे की भाषा से बनती एक खुबसूरत कविता )
हम कविता चुराते है. Read More »
Poetryकभी कभी,
बेवज़ह बातें हो जाती हैं,
जब दिल करता है जुड़ने का,
एक जरूरत निकल आती है…
( बेवजह बातों का भी कुछ वजह होता है. )
बेवजह बातें हो जाती हैं Read More »
Poetry