INSIDE ME

Inside Me

हर आदमी के अंदर एक और आदमी रहता है

यात्रा तो शुरू करो, रास्ते मिल ही जायेंगें -- आर.पी.यादव

तुम्हारा हर एक दिन, एक जीवन के समतुल्य है -- आर.पी.यादव

सूर्यास्त होने तक मत रुको, चीजें तुम्हे त्यागने लगे, उससे पहले तुम्ही उन्हें त्याग दो -- रामधारी सिंह दिनकर

हर परिस्थिति में एक खुबसूरत स्थिति छुपी होती है --आर पी यादव

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क्या करोगे नवबर्ष पाकर

क्या करोगे नववर्ष पाकर ?

कुछ लोग नववर्ष पर पागल हो जाते है. उन्हें भ्रम होता है एक नववर्ष पाने का और मुझे अफ़सोस होता है एक और वर्ष खोने का. हर बार नव वर्ष पूछता है “क्या करोगे नवबर्ष पाकर ?”

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नयापन

नयापन

आज का नया साल
फिर से पुराना होगा,
आज जो आया है
कल इसे भी जाना होगा…
( नववर्ष पर शोर मचाने की नहीं, उसे सार्थक बनाने की जरुरत है )

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