जिदगी का लेखा-जोखा
आज फिर हम,
जिंदगी के उस मोड़ पर आये है,
जिंदगी का लेखा जोखा साथ लेकर आये है,
देखे तो सही,
क्या खोया और क्या पाए है ?
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Poetryआज फिर हम,
जिंदगी के उस मोड़ पर आये है,
जिंदगी का लेखा जोखा साथ लेकर आये है,
देखे तो सही,
क्या खोया और क्या पाए है ?
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Poetryकुछ लोग नववर्ष पर पागल हो जाते है. उन्हें भ्रम होता है एक नववर्ष पाने का और मुझे अफ़सोस होता है एक और वर्ष खोने का. हर बार नव वर्ष पूछता है “क्या करोगे नवबर्ष पाकर ?”
क्या करोगे नववर्ष पाकर ? Read More »
Poetryजिन्दगी छोटी है,
इसके बीच में छुपी जवानी,
और भी छोटी है.
कभी संभल जाती है
कभी फिसल जाती है,
मुठ्ठी की रेत है यह,
आहिस्ते से निकल जाती है…