विचलन
विशवास की परिभाषा
कुछ और तो नहीं ?
प्रतीक्षा की सीमाएं
कहीं युग तो नहीं ?
(दरकती संबंधों पर एक अनोखी कविता )
कुछ प्रश्न,
अनुत्तरित होते है,
शायद इसी में उनकी
महत्ता, कायम रहती है
सत्ता, जीवित रहती है
अस्तित्व सुरक्षित रहता है…
पराई होती जिंदगी एक कविता के रूप में व्यक्ति की मज़बूरी चित्रित करता है. व्यक्ति अपने लिए कुछ नहीं कर पाता . उसकी अपनी ही जिंदगी उसके वश में नहीं होती.
अक्सर गुजरा हुआ सुनहरा वक्त, वर्तमान परिदृश्य में संदेहित हो जाता है . यकीन नही होता कि वास्तव में वह सच था या झूठ. “कल आज और कल ” इसी को चित्रित कराती रचना है.
किसी खामोश चेहरा को ध्यान से देखिये. वह एक किताब नजर आएगा. खामोश चेहरा पर एक अर्थपूर्ण कविता .
आज फिर हम,
जिंदगी के उस मोड़ पर आये है,
जिंदगी का लेखा जोखा साथ लेकर आये है,
देखे तो सही,
क्या खोया और क्या पाए है ?
जिदगी का लेखा-जोखा Read More »
Poetry