कविता क्या है ?
“कविता क्या है?” — यह कविता दिल में दबी भावनाओं, अधूरे सपनों और जीवन की उलझनों को उजागर करती है। इसमें प्यार, तन्हाई, इंतज़ार और बेबसी की एक ऐसी परत दिखाई देती है, जो पाठक के मन को भीतर तक छू जाती है।
“कविता क्या है?” — यह कविता दिल में दबी भावनाओं, अधूरे सपनों और जीवन की उलझनों को उजागर करती है। इसमें प्यार, तन्हाई, इंतज़ार और बेबसी की एक ऐसी परत दिखाई देती है, जो पाठक के मन को भीतर तक छू जाती है।
यह कविता एक साधारण व्यक्ति के आत्मसंघर्ष को दर्शाती है, जो हर दिन खुद को बदलने की शपथ लेता है, लेकिन बार-बार विफल हो जाता है। जब उसके प्रयत्न और संकल्प निष्फल होने लगते हैं, तब वह अपने इष्ट से यह प्रश्न पूछता है — क्या भाग्य कर्म से ऊपर है? यह कविता आत्मचिंतन, आस्था और प्रयास के बीच की कशमकश को शब्दों में पिरोती है।
क्या भाग्य कर्म से ऊपर है ? Read More »
Poetryअक्सर व्यक्ति वर्तमान परिस्थितियों के गिरफ्त में इस प्रकार आ जाता है कि उसकी सभी इक्क्षाएं क्षीण होती नजर आती हैं. उम्र गुजरती जाती है और इक्षाएं इन्तजार करती रहतीं है.
इन शब्दों की उम्र
हमारी उम्र से कही लम्बी है,
मनोभावों से निर्मित
शब्दों की ये श्रृंखला,
पहाड़ों से भी ऊची और
समंदर से गहरी है
शब्दों की महत्ता को दर्शाती एक सुंदर कविता.
वो कल,
जो आज को खा रहा है,
सदियों से तड़पा रहा है,
उम्र को घटा रहा है,
जिन्दगी को दौड़ा रहा है
कब आयेगा ?
प्रतिदिन की जिंदगी को एक डायरी की पृष्ट से तुलना की गयी है और यह भी बताया गया है की इन पृष्ठों की संख्या असीमित नहीं, सिमित है.