तराजू ...
कुछ लोग,
बिलकुल तराजू की तरह होते है
उतना ही रखते है दाहिने पलड़े पर
जितना वजन होता है बाएं पलड़े पर
ठीक भी है,
संतुलन बना रहता है
न दोस्ती अंदर तक आती है
और न दुश्मनी बाहर तक जाती है.
बिना अपेक्षाओं, उम्मीदों के साथ
जिंदगी चलती रहती है,
तमन्नाओं की तस्वीरें दबी रहतीं है….
कुछ लोग,
थोड़ा दयालु होते है
दाएं पलड़े को थोड़ा झुका देते है
अपने ग्राहक को मना लेते है.
व्यापार के रास्ते एक रिश्ता बन जाता है
खुश रहने का कोई वजह बन जाता है
हम इन्ही लोगों के आस पास है
किसी के लिए आम है,
किसी के लिए खास है….
★★★












