INSIDE ME

Inside Me

हर आदमी के अंदर एक और आदमी रहता है

यात्रा तो शुरू करो, रास्ते मिल ही जायेंगें -- आर.पी.यादव

तुम्हारा हर एक दिन, एक जीवन के समतुल्य है -- आर.पी.यादव

सूर्यास्त होने तक मत रुको, चीजें तुम्हे त्यागने लगे, उससे पहले तुम्ही उन्हें त्याग दो -- रामधारी सिंह दिनकर

हर परिस्थिति में एक खुबसूरत स्थिति छुपी होती है --आर पी यादव

Poetry

क्या भाग्य कर्म से ऊपर है

क्या भाग्य कर्म से ऊपर है ?

यह कविता एक साधारण व्यक्ति के आत्मसंघर्ष को दर्शाती है, जो हर दिन खुद को बदलने की शपथ लेता है, लेकिन बार-बार विफल हो जाता है। जब उसके प्रयत्न और संकल्प निष्फल होने लगते हैं, तब वह अपने इष्ट से यह प्रश्न पूछता है — क्या भाग्य कर्म से ऊपर है? यह कविता आत्मचिंतन, आस्था और प्रयास के बीच की कशमकश को शब्दों में पिरोती है।

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इस उम्मीद में कि

इस उम्मीद में कि…

अक्सर व्यक्ति वर्तमान परिस्थितियों के गिरफ्त में इस प्रकार आ जाता है कि उसकी सभी इक्क्षाएं क्षीण होती नजर आती हैं. उम्र गुजरती जाती है और इक्षाएं इन्तजार करती रहतीं है.

इस उम्मीद में कि… Read More »

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शब्दों की उम्र

शब्दों की उम्र

इन शब्दों की उम्र
हमारी उम्र से कही लम्बी है,
मनोभावों से निर्मित
शब्दों की ये श्रृंखला,
पहाड़ों से भी ऊची और
समंदर से गहरी है
शब्दों की महत्ता को दर्शाती एक सुंदर कविता.

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सपनों की स्वतंत्रता

सपनों की स्वतंत्रता

सपनों की स्वतंत्रता एक कविता है जो यह बताती है कि व्यक्ति जिन भावनाओं को चेतन अवस्था में नहीं व्यक्त पाता वह सपने में व्यक्त हो जाती हैं .

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