एक दिन की जिंदगी
कभी-कभी पूरी ज़िंदगी एक ही दिन में गुजर जाती है. न जाने कितनी बातें, कितनी भावनाएँ, और कितनी उम्मीदें उस एक दिन में सिमट जाती हैं. यह कविता उसी लम्हे की बात करती है — जब समय थम जाता है, जब हर पल एक उम्र बन जाता है.
यह कविता उन अनकहे अहसासों को छूती है, जो हम रोज़ जीते हैं लेकिन कभी व्यक्त नहीं कर पाते.
यह एक ऐसा दिन है जो शायद सबसे ज़्यादा मायने रखता है.
आइए, इस कविता के माध्यम से उस एक दिन की जिंदगी को महसूस करें —
जिसने हमारी सोच को बदल दिया, और शायद हमें भी.





