समान्तर रेखाएं
कुछ ऐसे रिश्ते होते है जो न आगे बढ़ते हैं और न पीछे हटते हैं. ऐसे रिश्ते एक निश्चित दूरी पर स्थिर बने रहते है. ” समान्तर रेखाएं ” उन्ही रिश्तो का चित्रण है.
कुछ ऐसे रिश्ते होते है जो न आगे बढ़ते हैं और न पीछे हटते हैं. ऐसे रिश्ते एक निश्चित दूरी पर स्थिर बने रहते है. ” समान्तर रेखाएं ” उन्ही रिश्तो का चित्रण है.
यह कविता समय के प्रवाह और आत्म-परिचय की खोज को बेहद संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करती है। बीते वर्षों की एक तस्वीर, आज की आत्मा से सवाल करती है — “तुम कौन हो?”। यह कविता अतीत और वर्तमान के बीच संवाद, उलझन और आत्ममंथन का गहन चित्रण करती है। पहचान की तलाश में हम कैसे खुद से ही दूर हो जाते हैं, यही इसकी मूल भावना है।