INSIDE ME

Inside Me

हर आदमी के अंदर एक और आदमी रहता है

यात्रा तो शुरू करो, रास्ते मिल ही जायेंगें -- आर.पी.यादव

तुम्हारा हर एक दिन, एक जीवन के समतुल्य है -- आर.पी.यादव

सूर्यास्त होने तक मत रुको, चीजें तुम्हे त्यागने लगे, उससे पहले तुम्ही उन्हें त्याग दो -- रामधारी सिंह दिनकर

हर परिस्थिति में एक खुबसूरत स्थिति छुपी होती है --आर पी यादव

चलो, कहीं और चलते हैं …

क्या हमने अपनी ज़िंदगी अपनी पसंद से जी है ? "चलो, कहीं और चलते हैं" एक ऐसे मन की आवाज़ है, जो वर्षों की जिम्मेदारियों और भाग-दौड़ के बाद अब थोड़ा अपने लिए जीना चाहता है.
चलो, कहीं और चलते हैं

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